स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गेत, NDTV इंडिया डेटोल बनेगा स्वछ कैंपेन के तहत टीम ने कई जगहओ का दौरा किया | इस ख़ास एपिसोड में उनोहने रुबरु कराएंगे कुछ लोंगो और संगठनों से जिन्होंने स्वच्छ भारत मिशन को अपनाया है | देशभर में NDTV ने दौरा किया और कुछ ऐसे सैलानियों से मुलाकात की |
हाइजीन किट
श्री अतुल मेहता और उनकी पत्नी श्रीमती मीना मेहता , किशोर बालिकाओं को नगरपालिकाओं स्कूलों में और स्लम में जाकर हाइजीन किट बाँट रहे हैं और ये दंपति स्वच्छ भारत मिशन में अपना योगदान दे रहे हैं

पिछले 4 साल से हर महीने मीना और अतुल शहर के नगर पालिका के स्कूल में जाते हैं वहां वह किशोर लड़कियों को हाइजीन किट देते हैं उसमें सेनेटरी नैपकिन, दो अंडर गारमेंट्स ,साबुन और चार शैम्पू पाउच होते हैं हर किट साठ रुपए का होता है लेकिन वह उसे मुफ्त में देते हैं और यह वह स्वच्छता के लिए करते हैं |
अकसर गरीब तबके की लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान स्कूल छोड़ने पर मजबूर किया जाता है लेकिन मेहता दंपति के प्रयास से लड़कियों के स्कूल के अटेंडेंस में सुधार आया है |
श्रीमती. मीना मेहता ने कहा की , सुनामी के समय इनफ़ोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती सुधा मूर्ति ने 4 ट्रक सैनिटेरी नैपकिन चैन्नई भेजा था उस दिन मुझे यह विचार आया की बिना सैनेटरी नैपकिन की एक लड़की कैसे रहे सकती है , वो क्या इस्तेमाल करेगी ? उस समय मुझे यह काम करने का विचार आया |
इसमें सरकार की इनकी कोई भागीदारी नहीं है, इस पूरी योजना का खर्च रुपए जमा किए हुए और फेसबुक पर से मिले दान के पैसों से करते हैं |
शौचालय बनाने में मदद
गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के छात्रों आस-पास के गांव में खुले में शौच मुक्त करने के लिए प्रशासन का साथ दे रहे हैं और स्वच्छता अभियान को आगे लेकर जा रहे हैं छात्रों की कोशिशों के वजह से अब तक राज्य भर में 107 गांव में 9000 शौचालय बनाए जा चुके हैं |

12 साल की निशा ठाकुर अब घर में बने नए शौचालय का नियमित रूप से सिर्फ इस्तेमाल ही नहीं करती बल्कि वो यह भी सुनिश्चित करती है कि उसके दोस्त भी स्वच्छता की प्रक्रिया को बनाए रखें |
अहमदाबाद से 40 किलोमीटर दूर निशा के गांव परढ़ोल में कुछ महीने पहले तक कोई शौचालय नहीं था इस वजह से बच्चों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता और स्कूल में उनका कीमती समय बर्बाद हो जाता |
गुजरात सरकार और गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी वालंटियर्स की मदद से अहमदाबाद के सैकड़ों गांव में शौचालय है.. पिछले कुछ महीनों में यूनिवर्सिटी ने 9000 शौचालय बनाने में मदद की |
श्री. C.C. सिंघवी , यूनिवर्सिटी को-ऑर्डिनेटर ने बताया, “अब तक हमारे करीबन 57 कॉलेज इसमें इंकलूड हो चुकी है, अब तक और उन लोगों ने 108 गांव में गए और करीबन हमारे 6000 पार्टिसिपेट किया और more than 900 टॉयलेट बनाने में उन्होंने सहायता की और एक बड़े योगदान दिया "
जिला प्रशासन अपनी तरफ से पूरा समर्थन कर रही है. सफाई की थीम पर गरबा और लोक नृत्य का भी आयोजन करता है और गांव को साफ रखने के लिए शपथ भी ली जा रही है |
झुग्गी बस्तियों में चलाया गया विशेष सफाई अभियान
ऐसा कौन है जो अपना जन्मदिन नहीं मनाना चाहता और वह भी एक खास अंदाज में - चेन्नई के कुछ लोगों का संगठन हर महीने स्वच्छ भारत को ध्यान में रखते हुए अपना जन्मदिन मनाते हैं इस अनोखी पहल के पीछे हैं श्री मधुसूदन गुप्ता .. चैन्नई की कुछ लोगों का संगठन हर महीने स्वच्छ भारत को ध्यान में रखते हुए अपना जन्मदिन मनाते हैं एक अनोखी पहल के पीछे हैं श्री मधुसूदन गुप्ता |
इंजीनियर मधुसूदन ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर चेन्नई की झुग्गी बस्तियों को साफ करने का बीड़ा उठाया एक कदम आगे बढ़ कर उन्होंने अपने बेटे कुशाल का चौथा जन्म दिन चेन्नई के पेरंबूर के मलिन बस्ती को अपने साथियों के साथ साफ करके बनाया.... 4 साल के कुशाल का जन्मदिन वाकई बेहद अलग था उन्होंने नहीं सोचा था कि वह एक चरण की शुरुआत कर रहे हैं |
श्री मदुसूदन गुप्ता के कहा, "हमारे पास सब कुछ है अब हम समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं हमने चेन्नई के परमbur को चुनाव और वहां से यह सामाजिक काम करना शुरू कर दिया और फिर हमने जन्मदिन मनाने का एक नया तरीका खोजा.... इस बार अगर हम तीन बच्चों का जन्मदिन एक साथ मनाए तो यह और अच्छा होगा "
मेट्टूबलम में तीन लोगों के जन्मदिन एक साथ मनाई ....विशाल ने अपना 18वां बर्थडे इसी मुहिम की तर्ज पर मनाया |
विशाल ने कहा , "अब मैं देश का एक जिम्मेदार नागरिक बन गया हूं आमतौर पर 18wa जन्मदिन पर हम खूब पार्टी करते हैं लेकिन मुझे गर्व है कि मैं यहां हूं और इन बच्चों की मदद कर पा रहा हूं "
एक माँ के कहा की, "यह पहली बार है जब हम इस तरह अपने बेटे का जन्मदिन मना रहे हैं आज हमने एक इलाके को साफ किया है और वहां की दीवारों पर पेंट किया दरअसल हम ने बच्चों को इसमें शामिल किया था उन्होंने मध्य मदन यह सब काम किया है "
जल प्रदूषण की समस्या
चेन्नई के जल स्रोत लगातार कूड़े और गंदगी के वजह से प्रदूषित हो रहे हैं. जल प्रदूषण की समस्या है जो पर्यावरण पर असर डाल रहा है ... इस समस्या से निजात पाने के लिए चेन्नई ट्रैकिंग क्लब शानदार काम कर रहा है |
चेन्नई में लगातार सीवरेज का पानी और कचरे को नदियों में बहाने की वजह से पानी के स्रोत गंदे हो गए हैं लेकिन नदियों और समंदर के किनारे हमें ज्यादातर थरमोकोल प्लास्टिक, बोतल जैसी चीजें मिलती हैं जो डी-कंपोस्ट नहीं हो सकते और यह पर्यावरण के लिए खतरनाक है |
श्री. N सुब्रमनियन , ने कहा "आप लोगों को गंदा कागज, खाने और पीने की चीजें पड़े हुएं मिलते हैं और यहां पर चलते वक्त कांच के टुकडे दिखाई देते हैं. मुझे यहां समंदर के किनारे चलने में डर लग रहा था, क्यूंकि यहं कांच के टुकड़े बिखरे हुए थे "
एक ट्रैकिंग क्लब जो एक गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए काम कर रहा है इसकी शुरुआत 2008 में हुई थी आप इस क्लब में 30000 वॉलेंटियर है और यह इस तरह से काम करते हैं.. ज्यादातर वॉलेंटियर नौकरी पेशे वालें है तो वह लोग सुबह सुबह सफाई का काम करते हैं और फिर अपने काम पर जाते हैं.... |
चेन्नई ट्रैकिंग क्लब के श्री. पीटर बेन गाएत ने कहा, "चेन्नई मैं रोजाना 6000 टन कचरा निकलता है और यह कचरा काशी जहरीला होता है हम ज्यादातर नदी के किनारों पर सफाई का काम कर रहे हैं क्योंकि इस शहर का ज्यादातर कचरा बहकर नदी के किनारे और समंदर के किनारे आ जाता है लेकिन कचरा इतना ही नहीं है यह सिर्फ 5 फ़ीसदी कचरा है "
श्री. अमित (वालंटियर ) कहते हैं , "हमे थर्माकोल, प्लास्टिक बैग और बोतल मिलती है उनमें से ज्यादातर डिकंपोज़ नहीं हो सकते ... खास कर प्लास्टिक से बनी हुई चीजें, हम तालाबों और नदियों की सफाई कर रहे हैं क्योंकि यह हमारी जिम्मेदारी है...यह कचरा नदी तालाब से नहीं निकल रहा है इसके जिम्मेदार हम हैं "
श्री. प्रभाकर मय्यपन ने कहा , "हमे सरकार की तरफ से और बोलेंगे उसका काफी समर्थन मिला जिसकी वजह से साफ सफाई का काम हो पा रहा है और वालंटियर लगातार आ रहे हैं हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है "
खुले में शौच मुक्त अभियान
सिर्फ आम लोग ही नहीं बल्कि सरकारी अधिकारी भी भारत को स्वच्छ बनाने के लिए जुड़े हुए हैं... चाहे वहे सुबह 4:00 बजे खुले में शौच को रोकने के लिए चौकसी हो या फिर गांव वालों को डराना और कहना उन्हें कि आपका नाम अखबार में दिया जाएगा अगर वह खुले में शौच करें प्रशासन की इस कोशिश की वजह से आज पूरे गांव में शौचालय है |

रत्तेवाली (पंचकूला) गांव के लिए यह जैसे रोज की दिनचर्या का हिस्सा है ... यहां पीढ़ियों से खुले में शौच किया जाता है और गांव वालों को भी इसमें कोई बुराई नजर नहीं आती ....कमला देवी के घर में एक जवान बेटी और एक बुजुर्ग महिलाएं हैं ... घर की चारदीवारी में बने टॉयलेट में इनके परिवार की महिलाओं का जीवन सुरक्षित बना दिया है |
लेकिन जिला अधिकारियों ने गांव वालों को जागरुक करने के लिए मुहिम चलाई... अधिकारी गांव में सुबह 4:00 बजे चौकसी के लिए पहुंचे और लोगों को घर में टॉयलेट बनाने के लिए प्रेरित किया |
श्री. योगेश कुमार , पंचायत सेक्रेटरी ने कहा , "ग्राम सभा की मीटिंग बुलाई गई... ग्राम सभा की मीटिंग में गांव वालों ने अपने ही तरफ से बताया भी अगर कोई व्यक्ति या उनका रिश्तेदार खुले में शौच करता हुआ पाया गया to उसके खिलाफ पंचायत 500 का फाइन लगाएगी... रु. 200 अगर कोई व्यक्ति उसकी सेल्फी या सूचना पंचायत को देता है तो रु.200 उसके and रु.300 जुरमाना "
पिछले महीने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ग्रामीण पंचकूला को खुले में शौच मुक्त करने पर पंचकूला के अधिकारियों को पुरस्कृत किया यहां तक कि अधिकारियों ने घरों में शौचालय बनाने के लिए गांव वालों में अखबारों में नाम छपवाने का भी डर बनवाया |
श्रीमती. गरिमा मित्तल , डीसी ने कहा, "हमने उनसे कहा कि क्यों ना इन 12 गांव के नाम प्रेस में दिया जाए जिससे सबको पता चलेगी इस गांव के लोग के पास टॉयलेट नहीं है और हमने उन्हें यह क्या क्या डराएगी उनके पोते पोतियों का स्कूल में मजाक उड़ाया जाएगा मुझे लगता है इसने काम किया क्योंकि गांव वाले खासकर बुजुर्गों ने कहा कि इससे हमारे गांव का नाम खराब होगा साथ ही हमारे गांव में शादी के रिश्ते नहीं आएंगे... इसी ने सब कुछ बदला है "
हरयाणा में सिरसा को शौचमुक्त घोषित कर दिया है अब राज्य सरकार ने बाकी सभी जिलों के लिए भी इस साल के अंत तक खुले में शौच मुक्त होने का लक्ष्य तय किया है
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट
किसी भी शहर के लिए सॉलिड वेस्ट को मैनेज करना चुनौती भरा काम होता है खास कर एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के लिए... महाबलीपुरम के घरों और होटलों से कचरा एक अलग तरीके से जमा किया जाता है और फिर इसे इस्तेमाल किया जाता है |
चेन्नई से 55 किलोमीटर दूर महाबलीपुरम को यूनेस्को ने विश्व विरासत का दर्जा दिया है.... 15 हजार की आबादी वाले इस कस्बे में हर साल करीब तीन लाख सैलानी आते हैं हर रोज करीब 6 टन कचरा यहां जमा होता है,,,, किसी ठोस कचरे को नया तरीके से चुकाने लगाने की वजह से महाबलीपुरम सुर्खियों में है |
शहर में आपको जगह-जगह कूड़े दान और तीन रंगों के बैग में नज़र आएंगे .... हरे रंग के बैग में जैविक कचरा इकट्ठा किया जाता है .....काले रंग के बैग में ऐसा कचरे रखा जाता है जो किसी काम नहीं आता और सफेद रंग के बैग में ऐसा कचरा जमा किया जाता है जिसे रीसायकल किया जा सके |
इसका में जुड़ी संस्था का नाम है ग्रीन फ्रेंड्स एंड मोटिवेटर्स , जिसकी कार्यकर्ता घर-घर जाकर यह कचरा जमा करते हैं जैविक कचरा और बेकार कचरा हर रोज जमा किया जाता है जबकि रीसायकल किया जाने वाला कचरा हफ्ते में एक बार जमा किया जाता है |
हैण्ड इन हैण्ड इंडिया नाम के एक एनजीओ ने कचरा प्रबंधन की इस योजना को शुरू किया इसका मुख्य मकसद शहर में कचरे के ढेर की जगह को कम से कम करना है कचरे के ढेर काफी जगह लेते हैं.... सेहत के लिए खतरनाक होते हैं और वायु और जल प्रदूषण की वजह बनते हैं..... यही है कि अधिक से अधिक कचरे को जमा कर उसकी खाद बनाई जाए और उसे रीसायकल किया जाए |
श्री. बी पुरुषोथम , डी जी ऍम ने कहा , "महाबलीपुरम को साफ रखना काफी जरूरी है शहर को साफ करने के अलावा हम कचरे को उसके स्रोत से ही साथ देते हैं.... शहर के करीब 75% की आबादी कचरे को शुरू में ही अलग अलग कर देती है और हम 82 % कचरे की खाद बनाने में कामयाब हो गए हैं ..... हमने एक बायोगैस प्लांट ही बनाया है जो खाने के सामान से पैदा कचरे से निकलने वाली मिथेन गैस से बिजली बनाता है "
खाने के कचरे को मीथेन गैस में बदला जाता है इस मीथेन गैस को बाद में 12.5 KVI या फिर 10 KW बायोगैस जनरेटर से बिजली बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.... इस से पैदा हुई बिजली से 30 स्ट्रीट लैंप को जलाया जाता है महाबलीपुरम के लोग गर्व से इस बारे में बात करते हैं और मानते हैं कि पर्यटन से जुड़े देश के दूसरे शहरों में भी इस मॉडल को अपनाया जा सकता है |
source : khabar.ndtv.com/video



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