गंगा एवं यमुना को ‘जीवित’ का दर्जा दिए जाने का आदेश
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 20 मार्च 2017 को ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कहा कि देश की दो पवित्र नदियों गंगा ओैर यमुना को जीवित मानव का दर्जा दिया जाए. अदालत ने आदेश में कहा कि जिस प्रकार किसी मानव को हानि पहुँचाने पर सज़ा मुकर्रर की जाती है उसी प्रकार नदियों के लिए भी सोचा जाना चाहिए.![]() |
| गंगा |
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| यमुना |
इस मामले के अधिवक्ता एम सी पंत द्वारा इस संबंध में न्यूज़ीलैण्ड की वानकुई नदी के बारे में बताया गया जिसे मानव का दर्जा दिया गया है.
आदेश के मुख्य बिंदु
• इस मामले पर हरिद्वार निवासी मोहम्मद सलीम द्वारा एक जनहित याचिका दायर की गयुई थी जिसके बाद मामले पर अदालत ने आदेश दिया.
• अदालत द्वारा जिलाधिकारी को ढकरानी में गंगा की शक्ति नहर से अगले 72 घंटों में अतिक्रमण हटाने के आदेश भी दिए गये. अदालत ने यह भी कहा कि इसका अनुपालन न होने की स्थिति में उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा.
• अदालत ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच उत्तराखंड के अलग प्रदेश बनने के बाद से लंबित विभिन्न संपत्तियों के बंटवारे को भी सुलझाने के आदेश दिए.
• हाई कोर्ट ने सरकार को अदालत द्वारा दिसंबर 2016 में दिए गए आदेश के अनुसार अगले आठ सप्ताह के अंदर गंगा प्रबंधन बोर्ड गठित करने के भी निर्देश दिए.
• गंगा और यमुना को एक जीवित मानव की तरह का कानूनी दर्जा देते हुए अदालत ने नमामि गंगे मिशन के निदेशक, उत्तराखंड के मुख्य सचिव और उत्तराखंड के महाधिवक्ता को नदियों के कानूनी अभिभावक होने के निर्देश दिए.
• इन अधिकारियों को गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों की सुरक्षा करने तथा उनके संरक्षण के लिये एक मानवीय चेहरे की तरह कार्य करने के लिए कहा गया.
• यह अधिकारी गंगा और यमुना के जीवित मानव का दर्जे को बरकरार रखने तथा इन नदियों के स्वास्थ्य और कुशलता को बढ़ावा देने के लिए बाध्य होंगे.
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ द्वारा इस आदेश में गंगा और यमुना के साथ एक जीवित मानव की तरह व्यवहार किये जाने का आदेश दिया गया.
इस मामले के अधिवक्ता एम सी पंत द्वारा इस संबंध में न्यूज़ीलैण्ड की वानकुई नदी के बारे में बताया गया जिसे मानव का दर्जा दिया गया है.
न्यूज़ीलैंड में वानगानोई नदी को इंसान का दर्जा मिला
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| वानगानोई नदी |
न्यूज़ीलैंड की संसद ने 15 मार्च 2017 को एक विधेयक को मंज़ूरी दी जिसके मुताबिक वानगानोई नदी को औपचारिक रूप से एक जीवित इंसान के अधिकार दे दिए गए.
माओरी जाति के द्वारा पूजी जाने वाली वानगानोई नदी को इस देश की संसद ने सभी मानवीय अधिकारों वाले एक इंसान के रूप में स्वीकार किया है. विश्व में किसी भी नदी को इंसान मानने की यह पहली घटना है.
न्यूज़ीलैंड के अटार्नी जनरल क्रिस फ़िनलिसन ने इस बारे में कहा कि इस नदी को अपनी विशेष पहचान, संबंधित अधिकार तथा एक नागरिक जैसे दायित्व एवं ज़िम्मेदारियां प्रदान की गई हैं.
हालांकि न्यूज़ीलैंड के इस क़ानून का मतलब यह है कि दो वकील क़ानूनी मामलों में इस नदी के हितों का रक्षा कर सकते हैं. इनमें से एक वकील का निर्धारण सरकार की ओर से होगा तथा दूसरे का निर्धारण माओरी जाति के लोग करेंगे.
नदी के लिए नागरिक जैसे शब्द का इस्तेमाल अभूतपूर्व है. यह न्यूज़ीलैंड की तीसरी सबसे बड़ी नदी है तथा माओरी जाति के समूह इसे पूज्य मानते हैं.
न्यूज़ीलैंड की संसद ने वानगानोई नदी को ऐसी परिस्तिथि में एक इंसान के अधिकार प्रदान किए हैं जब विश्व के विभिन्न देशों विशेष कर पश्चिमी और अरब देशों में लाखों-करोड़ों लोगों के अधिकारों का हनन किया जाता है.
माओरी समुदाय बीते करीब 160 से अधिक वर्ष से अपनी इस नदी को मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष कर रहा था.



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